अशोक सुराना
अध्यक्ष, अटूट संबंध यादव मैरिज ब्यूरोConnecting Souls, Honoring Traditions
विवाह: संस्कार, विश्वास और जीवनभर का संकल्प
मैं अशोक सुराना हूँ। मेरा जन्म एक छोटे से किसान परिवार में हुआ। मेरे पिताजी भारतीय सेना में थे। बचपन से ही मुझे परिश्रम, अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के संस्कार मिले। मेरी शिक्षा गाँव से प्रारंभ होकर मुरादनगर और मोदीनगर तक हुई। ग्रेजुएशन के दौरान मुझे दिल्ली पुलिस में अधिकारी के रूप में सेवा करने का अवसर मिला।
सरकारी सेवा सम्मानजनक थी, लेकिन मेरे मन में एक प्रश्न बार-बार उठता था। मैं देखता था कि अनेक व्यापारी, भले ही औपचारिक शिक्षा कम रखते हों, अपने व्यवहार, ईमानदारी और परिश्रम के बल पर निरंतर उन्नति कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात, वे केवल स्वयं ही आगे नहीं बढ़ रहे थे, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी दे रहे थे।
Read Moreतभी मैंने निश्चय किया कि जीवन में जोखिम उठाकर अपने सामर्थ्य को परखना चाहिए। मैंने सरकारी नौकरी का त्याग किया और व्यापार के क्षेत्र में कदम रखा। प्रारंभिक संघर्ष अवश्य रहे, पर मुझे अपने परिश्रम, ईश्वर की कृपा और सकारात्मक सोच पर अटूट विश्वास था। धीरे-धीरे सफलता का मार्ग खुलता गया।
आज मेरे दोनों पुत्र भी व्यापार के क्षेत्र में समर्पण और ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं। भगवान की कृपा से उनका कार्य भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों तक पहुँच रहा है। उन्हें आगे बढ़ते देखकर मुझे संतोष और गर्व का अनुभव होता है।क जीवन की कुंजी है।
मेरा दृढ़ विश्वास है कि यदुवंशी समाज केवल नौकरी करने वाला समाज नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला समाज भी बन सकता है। हमें व्यापार, उद्योग और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए। इतिहास साक्षी है कि आर्थिक रूप से सशक्त समाज ही राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ा योगदान देता है। व्यापार केवल व्यक्ति को समृद्ध नहीं बनाता, बल्कि समाज और राष्ट्र की आर्थिक नींव को भी मजबूत करता है।
इसी भावना के साथ हमने “अटूट संबंध यादव मैरिज ब्यूरो” की शुरुआत की है। यह केवल वैवाहिक संबंधों का मंच नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, परिवारों को सशक्त बनाने और आपसी विश्वास एवं सहयोग की संस्कृति को आगे बढ़ाने का एक विनम्र प्रयास है। मैं समाज के प्रत्येक परिवार से विनम्र अनुरोध करता हूँ कि इस अभियान को अपना अभियान समझें। आपका सहयोग, आपका विश्वास और आपकी सहभागिता ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। आइए, हम सब मिलकर ऐसा समाज बनाएं जो संस्कार, शिक्षा, आत्मनिर्भरता, एकता और सेवा के मूल्यों पर आगे बढ़े।
अंत में, एक प्रेरणादायक पंक्ति। “कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।” आइए, हम सब मिलकर वह पहला पत्थर उछालें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करे। जय श्री कृष्ण। जय गौ माता। जय गंगे माता।
मुझे विश्वास है कि यह संदेश आपकी जीवन-यात्रा, आपकी सोच और समाज के प्रति आपके समर्पण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगा।